जोधपुर में प्लॉट खरीदने से पहले क्या जाँचें
लेखक: Vikas Jyani, परख के प्रोपराइटर। आखिरी जाँच: 1 नवंबर 2026।
ये वे छह जाँच हैं जो हमारी टीम हर प्लॉट पर खरीदार के टोकन देने से पहले करती है। इनमें से ज़्यादातर जाँच सरकारी रिकॉर्ड देखकर खुद भी हो सकती हैं। कोई भी टोकन देने से पहले इन्हें कर लें: पैसा देने के बाद गड़बड़ी ठीक करना बहुत मुश्किल होता है।
शुरुआत में विक्रेता से उसके कागज़ों की कॉपी माँगें: सेल डीड या पट्टा, ज़मीन का रिकॉर्ड, 90A का आदेश और अप्रूव्ड नक्शा। नीचे की ज़्यादातर जाँच के लिए खसरा नंबर और गाँव का नाम चाहिए।
1. मालिक का नाम ज़मीन के रिकॉर्ड (जमाबंदी) से मेल खाता है
जमाबंदी ज़मीन का रिकॉर्ड है। इसमें खसरा नंबर के हिसाब से लिखा होता है कि ज़मीन किसके नाम है। इसे राज्य की ज़मीन के रिकॉर्ड की साइट अपना खाता पर देखें। वहाँ कॉपी मुफ़्त मिलती है और मोबाइल पर आए कोड से खुलती है, पर यह सर्टिफ़ाइड कॉपी नहीं होती। कौन-सा रिकॉर्ड देखना है, यह ज़मीन पर निर्भर है: राज्य के ज़मीन से जुड़े सिस्टम e-Panjiyan के होम पेज पर मिलेंगे।
पूरा नाम और पिता या पति का नाम विक्रेता की ID से मिलाएँ। अगर विक्रेता का हक सिर्फ़ पावर ऑफ़ अटॉर्नी (GPA), बेचने के एग्रीमेंट या वसीयत पर टिका है, तो सावधान रहें। सुप्रीम कोर्ट ने सूरज लैंप केस में कहा है कि इनसे मालिकाना हक नहीं बदलता। मालिकाना हक रजिस्टर्ड सेल डीड से बदलता है।
2. ज़मीन का रिकॉर्ड विक्रेता के नाम है (म्यूटेशन हो चुका)
म्यूटेशन (नामांतरण) से बिक्री या विरासत के बाद ज़मीन के रिकॉर्ड में नाम बदलता है। अगर विक्रेता ने ज़मीन खरीदी है और रिकॉर्ड में अभी भी पिछले मालिक का नाम है, तो म्यूटेशन नहीं हुआ। आगे बढ़ने से पहले इसका कारण पूछें।
ज़्यादातर म्यूटेशन में ज़्यादा समय नहीं लगता। अपना खाता के आँकड़ों के हिसाब से, 29 अक्टूबर 2026 तक जोधपुर ज़िले में 2,04,919 में से 2,00,211 म्यूटेशन का फ़ैसला हो चुका था। आधे 6 दिन के भीतर हुए, और औसत 14 दिन रहा।
ये आँकड़े राजस्व रिकॉर्ड के हैं। JDA के रिकॉर्ड में नाम बदलवाना अलग काम है: देखें UDH ऑनलाइन और JDA की साइट।
3. रिहायशी इस्तेमाल के लिए कन्वर्टेड (90A)
खेती की ज़मीन पर ऐसे ही मकान नहीं बन सकते। राजस्थान लैंड रेवेन्यू एक्ट की धारा 90-A के तहत पहले राज्य की लिखित अनुमति चाहिए (CAG की रिपोर्ट)। 90A का आदेश माँगें और उसके खसरा नंबर ज़मीन के रिकॉर्ड और विक्रेता के कागज़ों से मिलाएँ। आदेश में वह खसरा होना चाहिए जिसमें आपका प्लॉट है।
कन्वर्ज़न का मतलब मकान बनाने की मंज़ूरी नहीं है। वह मंज़ूरी अलग से लेनी होती है।
4. विक्रेता का बताया अप्रूवल असली है (JDA योजना या पट्टा)
JDA का अप्रूवल पूरे ले-आउट का होता है, किसी एक प्लॉट का नहीं (एक लेख)। इसलिए “JDA अप्रूव्ड” सुनकर ही न मान लें: अप्रूव्ड नक्शे पर उस प्लॉट का अपना नंबर ढूँढें। JDA की साइट पर ले-आउट प्लान, JDA की योजनाएँ और गैर-JDA योजनाएँ हैं।
किसी भी पोर्टल पर एक प्लॉट या पट्टे का नंबर पक्का नहीं होता। पक्का करने के लिए उस दफ़्तर से पूछें जिसने उसे जारी किया: JDA, नगर निगम या ग्राम पंचायत। जवाब लिखित में चाहिए तो RTI लगाएँ। UIT (अर्बन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट) के नाम के पुराने कागज़ सिर्फ़ इसी वजह से गलत नहीं होते: UIT की जगह अब JDA है।
5. e-Courts पर कोई कोर्ट केस नहीं मिला
e-Courts पर पार्टी के नाम से खोजें: विक्रेता का नाम, और कागज़ों में लिखे पिछले मालिकों के नाम। अलग-अलग स्पेलिंग से भी खोजें। कुछ न मिलना पक्का सबूत नहीं है: वहाँ वही मिलता है जो दर्ज हुआ हो, और उसी स्पेलिंग में जो आपने लिखी।
e-Panjiyan के e-Search पर उस प्रॉपर्टी के पिछले सौदे दिखते हैं, पर सिर्फ़ रजिस्टर्ड सौदे।
6. साइट पर सीमाएँ नक्शे से मेल खाती हैं
कागज़ों का नक्शा लेकर प्लॉट पर जाएँ। सीमाओं पर चलकर देखें, भुजाएँ और सामने की सड़क नापें, और देखें कि आस-पास कौन है। भू-नक्शा पर खसरे का नक्शा दिखता है, पर वह सिर्फ़ जानकारी के लिए है। अगर ज़मीन पर प्लॉट कागज़ से छोटा है, या उसे कोई और इस्तेमाल कर रहा है, तो रुकें और कारण पता करें।
परख यह कैसे करता है
प्लॉट लाइव होने से पहले हमारी टीम लिस्टिंग जाँचकर उसे मंज़ूरी देती है। खरीदार के टोकन देने से पहले हम छहों जाँच करते हैं। कुछ भी गलत लगे तो हम खरीदार को बताते हैं और सौदा रोक देते हैं। जो प्लॉट छहों जाँच पास कर ले, उस पर परख वेरिफ़ाइड दिखता है। देखें परख कैसे काम करता है।
यह एक जाँच है, मालिकाना हक (टाइटल) की गारंटी नहीं। टोकन देने या खरीदने से पहले कागज़ अपने वकील से जँचवाएँ।
ये बातें कहाँ से ली गईं
ऊपर का हर लिंक हमने 1 नवंबर 2026 को पढ़ा। सरकारी साइटें: अपना खाता, e-Panjiyan, e-Courts, भू-नक्शा, JDA, UDH और CAG। गैर-सरकारी: SCC Online पर सूरज लैंप केस का सार, और Vardhan Constructions का JDA अप्रूवल पर लेख।
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। रेट और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए इस पर चलने से पहले सरकारी स्रोत देखें या किसी वकील से पूछें।
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